Posts

पशु का समय पर हीट में ना आना पशुपालन की एक बड़ी समस्या-समाधान

Image
पशुपालन में सही समय पर पशु का हीट में ना आना डेयरी किसानों के लिए एक बड़ी समस्या हैI जिसका समाधान सही समय पर न करने से किसानों को करोड़ों रुपये की हानि होती हैI ऐसे में अधिकतर किसानों  की लाख-डेढ़ लाख की भैंस कटान में चली जाती हैI  समाधान कैसे करें ? गाय/भैंस को प्रसव के समय यदि कोई बीमारी जैसे जेर रुकना, गर्भाशय का संक्रमण होना, प्रोलेप्स आदि हो जाता है तो तुरंत पशुचिकित्सक से पूरा इलाज कराना है अन्यथा पशु समय से न हीट में आयेगा और न ही समय से गर्भ धारण करेगा। पशु का प्रसव अगर ठीक तरह से सम्पन्न हो गया है तो भी किसान को गर्भाशय की सफाई (छटाव) के लिए यूटेरोटोन / युटरासेफ जैसी कोई भी बाजार में उपलब्ध दवाई ब्याने के बाद पहले 10 दिन तक पशु को पिलानी चाहिए। ऐसा नहीं करेंगे तो गर्भाशय में संक्रमण (इन्फेक्शन) हो सकता है। जिसके कारण पशु समय से हीट में नहीं आयेगा। गाय/भैंस के समय से हीट में आने के लिए ब्यांत के पहले दो -तीन माह काफी महत्वपूर्ण होते हैं। आपको इस दौरान पशु का वेट लास ( वजन की कमी ) नहीं होने देना है। इस काल मे अधिकतम दुग्ध उत्पादन होता है और पशु के शरीर से दूध के रुप में...

ब्रूसेला रोग से पशु धन में होने वाली बड़ी हानि और बचाव

Image
दुधारू पशुओं में ब्रूसेला न केवल आर्थिक हानि का कारण बनता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य को भी इससे खतरा हैयह ब्लॉग पशुओं में ब्रूसेला के कारण होने वाले नुकसान, इसके लक्षण, बचाव के उपाय और रोकथाम के महत्व के बारे में है। ब्रूसेला बेक्टीरिया गर्भित पशु के प्लेसेंटा पर हमला करता है, जिससे गाय/भैंस में छठे महीने के बाद गर्भपात हो जाता है और पशु जेर नहीं डालता। ऐसे में फीटस (भ्रूण) गला सडा जैसा होता है। बाद में बांझपन और 10-15% दूध उत्पादन में कमी हो जाती है। जिससे किसानों को भारी आर्थिक हानि होती है। ब्रूसेला संक्रमण के बाद अगले गर्भधारण में देरी भी होती है। मानव स्वास्थ्य पर भी खतरा ब्रूसेला से स्त्री- पुरूष भी ग्रसित हो जाते हैं। यह एक तरह का पशुओं से मनुष्य को लगने वाला ज़ूनोटिक (पशुजन्य) रोग हैI मनुष्यों में यह बुखार,जोड़ों में दर्द, और पुरुषों में बांझपन का कारण बन सकता है। भारत में ब्रूसेला का प्रसार भारत में लगभग 12% पशुधन ब्रूसेला से संक्रमित हैं। बड़े डेयरी फार्म पर ब्रुसेला अधिक तेजी से फैलता है और डेयरी फार्म को बरबाद कर देता है। बचाव और रोकथाम  ब्रूसेला के खिलाफ बचाव में, हमें नि...

चना छिलका रातब में मिलाएं, पशु के लिए स्वादिष्ट आहार बनाएं

Image
अगर आप अपने पशु के लिए फाइबर एवं ऊर्जा का कोई बेहतर उपाय तलाश रहे हैं तो चना छिलका आपके लिए उत्तम विकल्प बन सकता है। इसे चना छिलका या चना छोलिया भी कहा जाता हैI चना छिलका प्रोटीन, फाइबर, और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो आपके पशुओं के स्वास्थ्य और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।  डेयरी किसान पशु के रातब में चने का छिलका इसलिए मिलाते हैं क्योंकि चने के छिलके के साथ दुधारू पशु रातब को पसंद करता है, चाव से खाता है। पसंदीदा चना छिलके के साथ पशु रातब और चारा  (भूसा, हरा चारा, साइलेज ) जो उसको खिलाया जाता है, को पेट भरकर खा लेता है। पशु पालक का पहला उद्देश्य होता है कि पशु पेट भर खा लेगा तो अधिक दूध देगा।  लेकिन होता क्या है कि अमूमन कई बार ऐसा रफेज (चारा,भूंसा, साइलेज) या दूसरा दाना देने पर जिसे पशु खाना पसंद नहीं करता। ऐसे में चना छिलका साथ में मिलाकर देने पर चने की महक सूंघकर पशु अन्य दाने को चाव से खा लेता है। चने का छिलका पानी में भिगोकर रखने से वो काफी फूल जाता है और देखने में रातब अधिक लगता है। पशु पालक इसे बाल्टी भरकर पशु को खिलाते हैं जिसे पशु चाव से खाता ह...

अपने पशुओं के लिए पशुपालक रातब का चयन कैसे करें?

Image
  पशुपालन में सफलता का पैमाना अक्सर दूध उत्पादन से तय होता हैI हर पशुपालक यही चाहता है कि उसके पशु स्वस्थ रहें और अधिकतम दूध दें, लेकिन पशुओं से अधिक दूध पाने के लिए सिर्फ इच्छा काफी नहीं है, बल्कि उनके लिए एक संतुलित आहार और स्मार्ट पशुपालन की आवश्यकता होती है । ऐसे में काफी लोगों का पूछना भी होता है कि पशु का दूध कैसे बढ़ेगा और उसे क्या खिलाना चाहिएI पशु से अधिक्तम दूध पाने के लिए उन्हें नियमित संतुलित रातब खिलाएंI क्योंकि  जब पशुओं को संतुलित आहार मिलता है, तो वे स्वस्थ रहते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और दूध उत्पादन की प्रक्रिया भी दुरुस्त रहती हैI नतीजा, आपको स्वस्थ पशु और अधिक मात्रा में दूध मिलता है । संतुलित रातब में अनाज की कितनी मात्रा होनी चाहिए : पूरे रातब में अनाज का प्रतिशत 35-40 होना चाहिए। अनाज में जई, मक्का, ज्वार, जौं, गेहूं, बाजरा रखें। किसान को बाजार में सभी अनाज के दाम की जानकारी रखनी चाहिए। क्योंकि मौसम के अनुसार ही बाजार में अनाज उपलब्ध होते हैं उसी के अनुसार दाम कम और ज्यादा निर्धारित किए जाते हैं।  अनाज का चयन कैसे करें? इसके द...

संतुलित आहार के साथ भैंसों के दूध उत्पादन में ऐसे करें सुधार (हिंदी)

Image
भैंस को स्वस्थ रखने और अधिक दूध का उत्पादन करने के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता होती हैI क्योंकि यह एक ऐसा आहार है जिसे भैंस की विशिष्ट पोषण आवश्यकता को पूरा करने के लिए तैयार किया गया हैI इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व शामिल होते हैं जैसे- प्रोटीन, फैट, मिनरल्स इत्यादि । भैंस से आने वाले ब्यांत में भरपूर दूध प्राप्त करने के लिए तैयारी भैंस के ब्याने के दो माह पहले से करनी चाहिए। गर्भधारण के अंतिम दो माह में भैंस के पेट में पल रहे फीटस (भ्रूण)में तेजी से वृद्धि होती है। अतः भैंस को बाॅडी साइज के अनुसार 2 से 3 किलो संतुलित आहार देना चाहिए। भैंस ब्याने से पहले अतिरिक्त वजन के साथ बॉडी कंडीशन स्कोर 4 या 4.5 प्राप्त कर ले। भैंस की त्वचा में सेहत की चमक आनी चाहिए। इसके लिए आप भैंस के ब्याने से दो माह पहले एक बार डिवर्मिंग करा दें। इस समय में अच्छे पशु प्रबधंन की आवश्यकता होती है जैसे: समय से पानी पिलाना, धूप-छाव में समय से बांधना और बाडे को स्वच्छ रखना आदि। भैंस के ब्याने के बाद ब्यांत के प्रारम्भिक दिनों में काविंग स्ट्रेस (बच्चा देना) और अधिक दूध उत्पादन के कारण भैंस का वजन कम होता जाता है। ...

भैंस के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के स्रोत के रूप में बिनोला खल एक उत्तम विकल्प (हिंदी)

Image
भैंस भारत में दूध उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इनकी उचित देखभाल और पोषण, बेहतर दूध उत्पादन और स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। बिनोला खल, भैंस के लिए बाइपास प्रोटीन का एक उत्तम स्रोत है। बिनोला खल में तेल की अच्छी मात्रा पायी जाती है। अतः यह पशुओं को अतिरिक्त प्रोटीन प्रदान करने के साथ साथ एनर्जी भी प्रदान करता है। जो पशु के शीघ्र परिपक्व होने एवं सफल प्रजनन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिनोला खल: भैंस के लिए क्यों आवश्यक है? पोषक तत्वों का भंडार: बिनोला खल में प्रोटीन,ऊर्जा, विटामिन E, B3,B4 और खनिज जैसे फास्फोरस, कापर और मैग्नीशियम होते हैं। यह सभी पोषक तत्व भैंस के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं। बिनोला खल भैंस के दूध उत्पादन में 10-15% तक वृद्धि कर सकता है। भैंस के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और बीमारियों से बचाता है। भैंस की प्रजनन क्षमता में वृद्धि करता है और पशुपालन को आर्थिक रूप से लाभदायक बनाता है। बिनोला खल के लाभ: बिनोला खल भैंसों के लिए एक उत्कृष्ट पोषण स्रोत के रूप में सेवन किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन, ऊर्जा, और विभिन्न खनिज तत्व होते है...

ऑनलाइन पशु खरीदने के लाभ और चुनौतियां: आपको क्या जानना चाहिए (हिंदी)

Image
क्या आप पशु खरीदने की सोच रहे हैं? अगर ऐसा है, तो आपके लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। आज तक पशुपालक  ऑफलाइन तरीकों जैसे: स्थानीय पशु मंडी/देहात से पशु खरीदते आए हैं लेकिन अब तो ऑनलाइन माध्यम से भी  पशु खरीदें जा सकते हैं I    स्थानीय पशु मंडी में अधिकतर उत्तम किस्म की मुर्रा भैंस नहीं मिलती है, किसान मुर्रा भैंस पसंद करते हैं और उसे खरीदने के लिए हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के दूर स्थित मंडियों और देहात के इलाकों में जाकर पशु तलाश कर खरीदते हैं I      किसानों को आने वाली परेशानियां:  नकद लेकर दूर जाने का जोखिम   पशु एक दिन में नहीं मिलता हैं जिसके चलते ठहेरने में काफी परेशानी होती हैI मंडियों में केवल एक टाइम की मिल्किंग देखी जा सकती है, जो पर्याप्त नहीं होतीI मंडी में विक्रेता पशु का एक टाइम का दूध रोक कर किसान को दिखाते हैI जिसके कारण सही दूध का पता नहीं लगता हैI    2-4 घंटे में किसान को पशु के बीमारी की कोई जानकारी नहीं मिल पातीI 1-2 पशु खरीदने पर परिवहन का खर्च अधिक लगता हैI  वहीं दूसरी तरफ ऑनलाइन माध्यम से मेराप...