पशु का समय पर हीट में ना आना पशुपालन की एक बड़ी समस्या-समाधान


पशुपालन में सही समय पर पशु का हीट में ना आना डेयरी किसानों के लिए एक बड़ी समस्या हैI जिसका समाधान सही समय पर न करने से किसानों को करोड़ों रुपये की हानि होती हैI ऐसे में अधिकतर किसानों  की लाख-डेढ़ लाख की भैंस कटान में चली जाती हैI 

समाधान कैसे करें ?

  1. गाय/भैंस को प्रसव के समय यदि कोई बीमारी जैसे जेर रुकना, गर्भाशय का संक्रमण होना, प्रोलेप्स आदि हो जाता है तो तुरंत पशुचिकित्सक से पूरा इलाज कराना है अन्यथा पशु समय से न हीट में आयेगा और न ही समय से गर्भ धारण करेगा।
  2. पशु का प्रसव अगर ठीक तरह से सम्पन्न हो गया है तो भी किसान को गर्भाशय की सफाई (छटाव) के लिए यूटेरोटोन / युटरासेफ जैसी कोई भी बाजार में उपलब्ध दवाई ब्याने के बाद पहले 10 दिन तक पशु को पिलानी चाहिए। ऐसा नहीं करेंगे तो गर्भाशय में संक्रमण (इन्फेक्शन) हो सकता है। जिसके कारण पशु समय से हीट में नहीं आयेगा।
  3. गाय/भैंस के समय से हीट में आने के लिए ब्यांत के पहले दो -तीन माह काफी महत्वपूर्ण होते हैं। आपको इस दौरान पशु का वेट लास ( वजन की कमी ) नहीं होने देना है। इस काल मे अधिकतम दुग्ध उत्पादन होता है और पशु के शरीर से दूध के रुप में काफी एनर्जी एवं मिनरल्स निकलते हैं और उचित पोषण न होने के कारण पशु का वजन के साथ साथ मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। अतः आपको इस अवधि में पशु को अच्छा चारा, संतुलित रातब और मिनरल मिक्चर देना चाहिए। बेहतर होगा कि आप  मेरापशु360 पर उपलब्ध संतुलित 15000 हाई एनर्जी (गोली खल) निर्दिष्ट डोज के अनुसार पशु को खिलाएं। अधिक दूध देने वाले पशु का वेट लॉस रोकने के लिए आप पशु को 100-200 ग्राम बाई पास फैट प्रतिदिन दे सकते हैं। घर पर बनाये गये रातब में अनाज की मात्रा 40 प्रतिशत और मिनरल मिक्चर 2 प्रतिशत रखें। बाकि खली,चूरी,चौकर मिलाएं। 

इसका तात्पर्य ये हुआ कि किसान को पशु के समय से हीट में लाने के लिए पशु के ब्याने के 4-5 माह बाद नहीं, पशु के ब्याने के तुरन्त बाद से उपरोक्त सावधानी रखनी चाहिए। अगर पशु ब्याने के 5-6 माह बाद तक हीट में नहीं आता है तब किसान पशु के हीट में न आने के बारे में  सोचकर चिंतित होता है तब तक काफी देरी हो चुकी होती है। 

भैंस दूध देना बंद कर देती है और किसान के ऊपर बोझ बन जाती है। दुखी होकर किसान भैंस को बड़े नुकसान से कटान में बेच देता है। ऐसे में अच्छा हो कि किसान अपनी सोच में सुधार लाएं और समय से पशु को हीट में लाने के लिए पशु के ब्याने के साथ ही सोचना शुरु कर दें। क्योंकि समय से हीट में न आने का कारण 70 प्रतिशत पोषण से संबंधित होता है, 30 प्रतिशत संक्रमण संबंधी होता है। अतः किसान को अपने पशु को संतुलित पोषण देना है और पशु के गर्भाशय को संक्रमण (इन्फेक्शन) फ्री रखने की समय से सावधानी बरतना है। इन सब तरीकों को अपनाकर आप अपने पशु को समय से हीट में ला सकते हैंI


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