मुर्रा भैंस डेयरी फार्मिंग के लिए सबसे अच्छी नस्लों में से एक क्यों है? (हिंदी)
ग्रामीण भारत में, 90% से अधिक किसान मिश्रित खेती करते हैं - फसलों की खेती और पशु पालन। किसान फसल के बचे-खुचे पदार्थ का उपयोग अपने डेयरी पशुओं के लिए करते हैं और यह उनके लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन जाता है। मिश्रित खेती में पशुओं का औसत झुंड (संख्या) आमतौर पर प्रति किसान 3 होता है। इसलिए, किसान सर्वोत्तम नस्ल के पशुओं को पालना चाहते हैं। किसानों के पास गाय और भैंस के रूप में विकल्प उपलब्ध होता है। आज के परिवेश में, क्रॉस-ब्रीड गायों में संक्रमण का बहुत अधिक खतरा होता है, तो किसानों का झुकाव स्वाभाविक रूप से भैंस चुनने की ओर है। भैंसों में मुर्रा नस्ल डेयरी फार्म किसानों की पहली पसंद है। पंजाब और हरियाणा भारत के वो प्रमुख राज्य हैं जहाँ भैंसों की उन बेहतरीन नस्लों का घर हैं, जो अपनी अधिक दूध उत्पादन और गुणवत्ता के लिए मशहूर हैं। हरियाणा और पंजाब मूल की मुर्रा भैंस भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे अधिक मांग वाली एवं पसंदीदा नस्लों में से एक है। यह भिवानी, हिसार, रोहतक, जिंद, झज्जर, फतेहाबाद, गुड़गांव और दिल्ली जिलों में पाई जाती हैं। मुर्रा भैंस की विशेषताएं उन्हें डेयरी फार्मिंग के लिए आर्थिक...