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मुर्रा और नीली रावी भैंस: पहचान, अंतर, और सही चयन की पूरी जानकारी

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  किसान भाइयों के लिए अच्छा दूध उत्पादन करना उनकी आजीविका का एक अहम हिस्सा है। इसके लिए सही और स्वस्थ पशु का चयन करना आवश्यक है। बाजार में अक्सर मुर्रा और नीली रावी भैंस एक जैसी दिखने के कारण किसान इनकी पहचान नहीं कर पाते हैं। सही चयन के लिए इनके बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है ताकि आपको अपनी आजीविका के लिए बेहतर पशु मिल सके। मुर्रा और नीली रावी भैंस की मुख्य पहचान: मुर्रा भैंस और नीली रावी भैंस में काफी समानताएं होती हैं, लेकिन दोनों की अपनी अलग विशेषताएं और पहचान हैं। 1. रंग और शरीर की बनावट मुर्रा भैंस का रंग गहरा जेट ब्लैक होता है, जो इसे विशेष बनाता है। वहीं, नीली रावी भैंस का रंग उतना गहरा नहीं होता और उसके शरीर पर सफेद धब्बे देखने को मिलते हैं, खासकर माथे, थूथन, पैरों और पूंछ के पास। नीली रावी की आंखें भी नीली होती हैं और उसकी बरौनियां सफेद होती हैं, जो उसकी एक अनोखी पहचान है। वहीं, मुर्रा की आंखें चमकदार होती हैं। 2. सींग का आकार और घुमाव मुर्रा भैंस की सींग घुमावदार होती हैं और इसमें अधिक छल्ले होते हैं, जबकि नीली रावी की सींग में कम घुमाव होता है और यह अधिक लंबी होती हैं। 3....

पशुओं के बदलाव अवधि के समय परिवर्तन आहार ‘ट्रांजिशन फीड’ खिलाएं: आने वाले ब्यांत में अधिकतम दूध पाएं

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  पशुपालक भाइयों दुधारू पशु गाय/भैंस के बदलाव की अवधि यानी की ‘ट्रांजिशन पीरियड’ में परिवर्तन आहार ‘ट्रांजिशन फीड’ दिया जाए तो आपका पशु आने वाली ब्यांत में क्षमतानुसार अधिकतम दूध देगी और आपकी आय को बढ़ाएगी। साथ ही आपकी भैंस ब्याने के 2-3 माह के बीच गर्भ धारण कर लेगी। डेरी फार्म में लाभ पाने के लिए गाय/भैंस का समय से गर्भधारण करना बिल्कुल महत्वपूर्ण है। तो आइए जाने क्या है- ‘ट्रांजिशन पीरियड’ और ‘ट्रांजिशन फीड’I बदलाव की अवधि (ट्रांजिशन पीरियड) क्या है? दुधारू पशु के ब्याने के 21 दिन पहले और 21 दिन बाद तक का पीरियड ट्रांजिशन पीरियड कहलाता है। इस अवधि में दुधारू पशु का तनाव स्तर अधिक रहता है। क्योंकि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास गर्भकाल के अंतिम दिनों में तेजी से होता है। और उनके शरीर की पोषक तत्वों की मांग बढ़ जाती है। दूसरी ओर इस पीरिअड में गाभिन पशु पूरा चारा/ रातब नहीं खाता है। अतः इस पीरियड में अधिक पोषण की पूर्ति के लिए किसान को अपने पशु को परिवर्तन आहार मलतब ‘ट्रांजिशन फीड’ खिलाना चाहिए। ‘ट्रांजिशन फीड’ की विशेषता: ऊर्जा और मिनरल का घनिष्ठ मिश्रण : ट्रांजिशन फीड कम मात...