ब्रूसेला रोग से पशु धन में होने वाली बड़ी हानि और बचाव


दुधारू पशुओं में ब्रूसेला न केवल आर्थिक हानि का कारण बनता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य को भी इससे खतरा हैयह ब्लॉग पशुओं में ब्रूसेला के कारण होने वाले नुकसान, इसके लक्षण, बचाव के उपाय और रोकथाम के महत्व के बारे में है।

ब्रूसेला बेक्टीरिया गर्भित पशु के प्लेसेंटा पर हमला करता है, जिससे गाय/भैंस में छठे महीने के बाद गर्भपात हो जाता है और पशु जेर नहीं डालता। ऐसे में फीटस (भ्रूण) गला सडा जैसा होता है। बाद में बांझपन और 10-15% दूध उत्पादन में कमी हो जाती है। जिससे किसानों को भारी आर्थिक हानि होती है। ब्रूसेला संक्रमण के बाद अगले गर्भधारण में देरी भी होती है।

मानव स्वास्थ्य पर भी खतरा

ब्रूसेला से स्त्री- पुरूष भी ग्रसित हो जाते हैं। यह एक तरह का पशुओं से मनुष्य को लगने वाला ज़ूनोटिक (पशुजन्य) रोग हैI मनुष्यों में यह बुखार,जोड़ों में दर्द, और पुरुषों में बांझपन का कारण बन सकता है।

भारत में ब्रूसेला का प्रसार

भारत में लगभग 12% पशुधन ब्रूसेला से संक्रमित हैं। बड़े डेयरी फार्म पर ब्रुसेला अधिक तेजी से फैलता है और डेयरी फार्म को बरबाद कर देता है।

बचाव और रोकथाम 

ब्रूसेला के खिलाफ बचाव में, हमें निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

1. पशुधन की प्राकृतिक सर्विस कराने से बचना चाहिए क्योंकि ब्रूसेला संक्रमित सांड से ही फैलता है। लेकिन कृत्रिम गर्भाधान (AI) से ब्रुसेला से बचा जा सकता है। AI का जो सीमन है उसमें ब्रूसेला बीमारी की पहले से टेस्टिंग (जांच) की जाती है।

2. संक्रमित पशुओं को अलग रखना: यह एक पशु से दूसरे पशु में फैलने वाली बीमारी है। क्योंकि भैंस का जब गर्भपात होता है उसका स्राव दूसरे पशुओं को भी संक्रमित कर देता है। तो ऐसे में संक्रमित पशुओं को बाकियों से अलग रखें।

3. संक्रमित गर्भपात का उचित निपटान: गर्भपात के फीटस (बच्चे) को दूर कहीं मिट्टी के नीचे दबा देना चाहिए ताकि यह बीमारी कहीं और ना फैले।

4. नए पशुओं का ब्रूसेला जांच अनिवार्य: पशु क्रय से पहले ब्रूसेला जांच होनी चाहिए। अन्यथा वह पशु फार्म पर ब्रूसेला का स्रोत हो जायेगाI

टीकाकरण :

4-7 महीने की उम्र में मादा बछियों का टीकाकरण कराना चाहिए। ब्रूसेला बीमारी का टीका बाजार में उपलब्ध है। मादा काफ में इसे लगाने का सही समय 4-7 महीने की उम्र पर होता है। लेकिन किसान इतना जागरुक नहीं होता है। इस पर विशेष ध्यान देने और समय पर टीकारण करने की आवश्यकता है। ब्रूसेला दुधारू पशुओं के लिए एक गंभीर खतरा है जिसे सामूहिक प्रयासों से ही नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता, रोकथाम और टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित करके, हम अपने पशुधन और मानव स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।


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