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संतुलित आहार के साथ भैंसों के दूध उत्पादन में ऐसे करें सुधार (हिंदी)

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भैंस को स्वस्थ रखने और अधिक दूध का उत्पादन करने के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता होती हैI क्योंकि यह एक ऐसा आहार है जिसे भैंस की विशिष्ट पोषण आवश्यकता को पूरा करने के लिए तैयार किया गया हैI इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व शामिल होते हैं जैसे- प्रोटीन, फैट, मिनरल्स इत्यादि । भैंस से आने वाले ब्यांत में भरपूर दूध प्राप्त करने के लिए तैयारी भैंस के ब्याने के दो माह पहले से करनी चाहिए। गर्भधारण के अंतिम दो माह में भैंस के पेट में पल रहे फीटस (भ्रूण)में तेजी से वृद्धि होती है। अतः भैंस को बाॅडी साइज के अनुसार 2 से 3 किलो संतुलित आहार देना चाहिए। भैंस ब्याने से पहले अतिरिक्त वजन के साथ बॉडी कंडीशन स्कोर 4 या 4.5 प्राप्त कर ले। भैंस की त्वचा में सेहत की चमक आनी चाहिए। इसके लिए आप भैंस के ब्याने से दो माह पहले एक बार डिवर्मिंग करा दें। इस समय में अच्छे पशु प्रबधंन की आवश्यकता होती है जैसे: समय से पानी पिलाना, धूप-छाव में समय से बांधना और बाडे को स्वच्छ रखना आदि। भैंस के ब्याने के बाद ब्यांत के प्रारम्भिक दिनों में काविंग स्ट्रेस (बच्चा देना) और अधिक दूध उत्पादन के कारण भैंस का वजन कम होता जाता है। ...

भैंस के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के स्रोत के रूप में बिनोला खल एक उत्तम विकल्प (हिंदी)

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भैंस भारत में दूध उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इनकी उचित देखभाल और पोषण, बेहतर दूध उत्पादन और स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। बिनोला खल, भैंस के लिए बाइपास प्रोटीन का एक उत्तम स्रोत है। बिनोला खल में तेल की अच्छी मात्रा पायी जाती है। अतः यह पशुओं को अतिरिक्त प्रोटीन प्रदान करने के साथ साथ एनर्जी भी प्रदान करता है। जो पशु के शीघ्र परिपक्व होने एवं सफल प्रजनन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिनोला खल: भैंस के लिए क्यों आवश्यक है? पोषक तत्वों का भंडार: बिनोला खल में प्रोटीन,ऊर्जा, विटामिन E, B3,B4 और खनिज जैसे फास्फोरस, कापर और मैग्नीशियम होते हैं। यह सभी पोषक तत्व भैंस के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं। बिनोला खल भैंस के दूध उत्पादन में 10-15% तक वृद्धि कर सकता है। भैंस के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और बीमारियों से बचाता है। भैंस की प्रजनन क्षमता में वृद्धि करता है और पशुपालन को आर्थिक रूप से लाभदायक बनाता है। बिनोला खल के लाभ: बिनोला खल भैंसों के लिए एक उत्कृष्ट पोषण स्रोत के रूप में सेवन किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन, ऊर्जा, और विभिन्न खनिज तत्व होते है...

ऑनलाइन पशु खरीदने के लाभ और चुनौतियां: आपको क्या जानना चाहिए (हिंदी)

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क्या आप पशु खरीदने की सोच रहे हैं? अगर ऐसा है, तो आपके लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। आज तक पशुपालक  ऑफलाइन तरीकों जैसे: स्थानीय पशु मंडी/देहात से पशु खरीदते आए हैं लेकिन अब तो ऑनलाइन माध्यम से भी  पशु खरीदें जा सकते हैं I    स्थानीय पशु मंडी में अधिकतर उत्तम किस्म की मुर्रा भैंस नहीं मिलती है, किसान मुर्रा भैंस पसंद करते हैं और उसे खरीदने के लिए हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के दूर स्थित मंडियों और देहात के इलाकों में जाकर पशु तलाश कर खरीदते हैं I      किसानों को आने वाली परेशानियां:  नकद लेकर दूर जाने का जोखिम   पशु एक दिन में नहीं मिलता हैं जिसके चलते ठहेरने में काफी परेशानी होती हैI मंडियों में केवल एक टाइम की मिल्किंग देखी जा सकती है, जो पर्याप्त नहीं होतीI मंडी में विक्रेता पशु का एक टाइम का दूध रोक कर किसान को दिखाते हैI जिसके कारण सही दूध का पता नहीं लगता हैI    2-4 घंटे में किसान को पशु के बीमारी की कोई जानकारी नहीं मिल पातीI 1-2 पशु खरीदने पर परिवहन का खर्च अधिक लगता हैI  वहीं दूसरी तरफ ऑनलाइन माध्यम से मेराप...

पशु आहार की गुणवत्ता पर भंडारण और रख-रखाव का प्रभाव (हिंदी)

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पशु आहार पशुओं के पोषण के लिए आवश्यक होता है। यह उन्हें स्वस्थ और उत्पादक रहने में मदद करता है। पशु आहार की गुणवत्ता उसकी नमी, भंडारण स्थान और रख-रखाव पर भी निर्भर करती है। यदि पशु आहार उचित स्थान पर नहीं रखा जाता है, तो उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। पशु आहर जैसे- सरसों की खल, बिनौले की खल, चना चूरी, चोकर, दलिया और संतुलित पशु आहार इन सभी पर भंडारण के दौरान ऐसा प्रभाव भी पड़ सकता है, जो पशु को नुकसान पहुंचा दे। अथवा दुर्गंध युक्त पशु के न खाने योग्य हो जाए। जैसे: पशु आहार में फफूंद लगना, सुरसुरी आनाI ऐसा होना भी 2 बातों पर निर्भर करता है: पहला: जहाँ पर आपका भंडारण है उसकी स्थिति कैसी है? वो कितना हवादार है, उसमें सीलन आती है या नहीं , साफ-सुथरा है कि नहीं इत्यादि चीजे मायने रखती हैं । दूसरा: आप भंडारण के लिए जो पशु आहार रख रहे है उसमें नमी कितनी है? पशु आहार में नमी 10 से 11 प्रतिशत होनी चाहिए। ऐसे तो नहीं जो पशु आहार आप रख रहे हैं उसमें नमी का प्रतिशत अधिक है या उसके बैग का पहले से ही कुछ भाग भीगा हुआ हो । क्योंकि अधिक नमी और भीगे पशु आहार खली, चूरी, चौकर आदि में फंगस की संभावना रहती...

पशु कहां से खरीदें: विभिन्न स्रोतों और विकल्पों की खोज (हिंदी)

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मिक्स फार्मिंग में डेयरी क्षेत्र का विस्तार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि किसान के पास कृषि योग्य भूमि कम होती जा रही है। इसलिए भारत में पशुपालन का अत्यधिक महत्व है। भारत के किसान खेती करने के साथ-साथ पशु पालन भी करते आ रहे हैं जिससे उनकी आय में अधिक वृद्धि होती है। देखा जाए तो पशुपालन कृषि का एक अभिन्न अंग है जिसे किसानों की आमदनी बढ़ाने का सबसे सटीक व्यवसाय माना जाता है। आज दूध उत्पादन (डेयरी) व्यवसाय एक डेयरी उद्योग के रूप में स्थापित हो चुका है। डेयरी व्यवसाय मिक्स फार्मिंग में आजीविका का एक परंपरागत स्रोत रहा है तथा इसका भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के साथ करीबी नाता रहा है। आमतौर पर भारत में दूध उत्पादन के लिए गायों और भैसों को पाला जाता है।  ऐसे में प्रत्येक पशुपालक अधिक दूध देने वाला पशु खरीदना चाहते हैं। भारत में पशुओं की कीमत उनकी नस्ल, ब्यात और दूध पर आधारित होती है। देखा जाए तो दुधारू पशुओं में डेयरी के लिए भैसों की डिमांड ज्यादा रहती हैं। लेकिन डेयरी के लिए सर्वोतम मुर्रा नस्ल की भैंस पशुपालकों की पहली पसंद हैI हरियाणा राज्य के अधिकतर जिलों जैसे- जींद, हिसार, रोहतक, ...

पशु आहार में संतुलित पोषण का महत्त्व : पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता के लिए इसलिए जरुरी है (हिंदी)

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किसान भाइयों आज हम पशुओं के लिए संतुलित पशु आहार के बारे में बताएंगे कि पशु आहार में संतुलन का क्या महत्त्व हैI कोई भी भोजन चाहे वो पशु के लिए हो या फिर इंसान के लिए उसमें प्रोटीन, एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट एवं फैट, मिनरल्स, विटामिन्स और इनके अंदर का संतुलन जरुरी होता हैI पशुओं को सही पशु आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है। देखा जाए तो इनका मुख्य भोजन चारा है। लेकिन चारे से पशुओं को सभी पोषक तत्व उत्पादन के अनुसार नहीं मिलते हैं। पशुओं के आहार में कई पोषक तत्वों जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज आदि शामिल होना चाहिए। यदि आपको पशु आहार का पूरा सदुपयोग करना है तो प्रोटीन, फैट, फाइबर, मिनरल्स, विटामिन्स यह सभी आपको पशु को एक साथ देने होंगेI हमारे अधिकतर किसान भाई अक्सर पशु आहार में पशु को कभी केवल सरसों की खल खिलाते हैं, जब सरसों की खल खिलाते हैं तो प्रोटीन अधिक होती है और एनर्जी कम हो जाती हैI तो कभी वो पशु को केवल अनाज खिलाते हैं तो एनर्जी अधिक और प्रोटीन कम हो जाता है। दोनों दशाओं में दी गयी अधिक प्रोटीन एवं अधिक एनर्जी का पशु के दुग्ध उत्पादन और शारीरिक वृद्धि में कोई लाभ नहीं होताI इसक...

मेरापशु360 चना चूरी की विशेषताएं हैं खास दूध की क्षमता और फैट बढ़ाने में मददगार (हिंदी)

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  चने की चूरी एक पारंपरिक पशु आहार हैI जिसे पशु चाव से पसंद करके खाते हैंI आम तौर पर डेयरी  किसान अपने पशु को चने की चूरी खिलाते हैंI यह दूध उत्पादन बढ़ाने, स्वास्थ्य एवं पाचन को ठीक रखने  में सहायक हैI चने की चूरी पशुओं के लिए एक बेहतरीन आहार है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। चने की चूरी पशुओं का दूध बढ़ाने एवं स्वस्थ रखने में मदद करती है।  डेयरी किसान अपने पशु को चने की चूरी खिलाना पसंद करते हैं। यह दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है, साथ ही यह स्वास्थ्य और पोषण को ठीक रखने में सहायक है। बाजार में मिलने वाली चने की चूरी में मिलावट हो सकती है, इसलिए आप मेरापशु360 की प्रीमियम चना चूरी खरीद सकते हैं। इसमें प्रोटीन और एनर्जी का संतुलित स्रोत होता है। चने की चूरी में पाए जाने वाले पोषक तत्व इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट,फाइबर,विटामिन्स, मिनरल्स जैसे-आयोडीन, कापर, आयरन, फॉस्फोरस शामिल हैंI चने की चूरी से दूध और फैट कैसे बढ़ता है? चने की चूरी में प्रोटीन की उचित मात्रा होती है। प्रोटीन पशुओं के शरीर के विकास औ...