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ऑनलाइन पशु खरीदने के लाभ और चुनौतियां: आपको क्या जानना चाहिए (हिंदी)

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क्या आप पशु खरीदने की सोच रहे हैं? अगर ऐसा है, तो आपके लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। आज तक पशुपालक  ऑफलाइन तरीकों जैसे: स्थानीय पशु मंडी/देहात से पशु खरीदते आए हैं लेकिन अब तो ऑनलाइन माध्यम से भी  पशु खरीदें जा सकते हैं I    स्थानीय पशु मंडी में अधिकतर उत्तम किस्म की मुर्रा भैंस नहीं मिलती है, किसान मुर्रा भैंस पसंद करते हैं और उसे खरीदने के लिए हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के दूर स्थित मंडियों और देहात के इलाकों में जाकर पशु तलाश कर खरीदते हैं I      किसानों को आने वाली परेशानियां:  नकद लेकर दूर जाने का जोखिम   पशु एक दिन में नहीं मिलता हैं जिसके चलते ठहेरने में काफी परेशानी होती हैI मंडियों में केवल एक टाइम की मिल्किंग देखी जा सकती है, जो पर्याप्त नहीं होतीI मंडी में विक्रेता पशु का एक टाइम का दूध रोक कर किसान को दिखाते हैI जिसके कारण सही दूध का पता नहीं लगता हैI    2-4 घंटे में किसान को पशु के बीमारी की कोई जानकारी नहीं मिल पातीI 1-2 पशु खरीदने पर परिवहन का खर्च अधिक लगता हैI  वहीं दूसरी तरफ ऑनलाइन माध्यम से मेराप...

पशु आहार की गुणवत्ता पर भंडारण और रख-रखाव का प्रभाव (हिंदी)

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पशु आहार पशुओं के पोषण के लिए आवश्यक होता है। यह उन्हें स्वस्थ और उत्पादक रहने में मदद करता है। पशु आहार की गुणवत्ता उसकी नमी, भंडारण स्थान और रख-रखाव पर भी निर्भर करती है। यदि पशु आहार उचित स्थान पर नहीं रखा जाता है, तो उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। पशु आहर जैसे- सरसों की खल, बिनौले की खल, चना चूरी, चोकर, दलिया और संतुलित पशु आहार इन सभी पर भंडारण के दौरान ऐसा प्रभाव भी पड़ सकता है, जो पशु को नुकसान पहुंचा दे। अथवा दुर्गंध युक्त पशु के न खाने योग्य हो जाए। जैसे: पशु आहार में फफूंद लगना, सुरसुरी आनाI ऐसा होना भी 2 बातों पर निर्भर करता है: पहला: जहाँ पर आपका भंडारण है उसकी स्थिति कैसी है? वो कितना हवादार है, उसमें सीलन आती है या नहीं , साफ-सुथरा है कि नहीं इत्यादि चीजे मायने रखती हैं । दूसरा: आप भंडारण के लिए जो पशु आहार रख रहे है उसमें नमी कितनी है? पशु आहार में नमी 10 से 11 प्रतिशत होनी चाहिए। ऐसे तो नहीं जो पशु आहार आप रख रहे हैं उसमें नमी का प्रतिशत अधिक है या उसके बैग का पहले से ही कुछ भाग भीगा हुआ हो । क्योंकि अधिक नमी और भीगे पशु आहार खली, चूरी, चौकर आदि में फंगस की संभावना रहती...

पशु कहां से खरीदें: विभिन्न स्रोतों और विकल्पों की खोज (हिंदी)

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मिक्स फार्मिंग में डेयरी क्षेत्र का विस्तार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि किसान के पास कृषि योग्य भूमि कम होती जा रही है। इसलिए भारत में पशुपालन का अत्यधिक महत्व है। भारत के किसान खेती करने के साथ-साथ पशु पालन भी करते आ रहे हैं जिससे उनकी आय में अधिक वृद्धि होती है। देखा जाए तो पशुपालन कृषि का एक अभिन्न अंग है जिसे किसानों की आमदनी बढ़ाने का सबसे सटीक व्यवसाय माना जाता है। आज दूध उत्पादन (डेयरी) व्यवसाय एक डेयरी उद्योग के रूप में स्थापित हो चुका है। डेयरी व्यवसाय मिक्स फार्मिंग में आजीविका का एक परंपरागत स्रोत रहा है तथा इसका भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के साथ करीबी नाता रहा है। आमतौर पर भारत में दूध उत्पादन के लिए गायों और भैसों को पाला जाता है।  ऐसे में प्रत्येक पशुपालक अधिक दूध देने वाला पशु खरीदना चाहते हैं। भारत में पशुओं की कीमत उनकी नस्ल, ब्यात और दूध पर आधारित होती है। देखा जाए तो दुधारू पशुओं में डेयरी के लिए भैसों की डिमांड ज्यादा रहती हैं। लेकिन डेयरी के लिए सर्वोतम मुर्रा नस्ल की भैंस पशुपालकों की पहली पसंद हैI हरियाणा राज्य के अधिकतर जिलों जैसे- जींद, हिसार, रोहतक, ...

पशु आहार में संतुलित पोषण का महत्त्व : पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता के लिए इसलिए जरुरी है (हिंदी)

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किसान भाइयों आज हम पशुओं के लिए संतुलित पशु आहार के बारे में बताएंगे कि पशु आहार में संतुलन का क्या महत्त्व हैI कोई भी भोजन चाहे वो पशु के लिए हो या फिर इंसान के लिए उसमें प्रोटीन, एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट एवं फैट, मिनरल्स, विटामिन्स और इनके अंदर का संतुलन जरुरी होता हैI पशुओं को सही पशु आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है। देखा जाए तो इनका मुख्य भोजन चारा है। लेकिन चारे से पशुओं को सभी पोषक तत्व उत्पादन के अनुसार नहीं मिलते हैं। पशुओं के आहार में कई पोषक तत्वों जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज आदि शामिल होना चाहिए। यदि आपको पशु आहार का पूरा सदुपयोग करना है तो प्रोटीन, फैट, फाइबर, मिनरल्स, विटामिन्स यह सभी आपको पशु को एक साथ देने होंगेI हमारे अधिकतर किसान भाई अक्सर पशु आहार में पशु को कभी केवल सरसों की खल खिलाते हैं, जब सरसों की खल खिलाते हैं तो प्रोटीन अधिक होती है और एनर्जी कम हो जाती हैI तो कभी वो पशु को केवल अनाज खिलाते हैं तो एनर्जी अधिक और प्रोटीन कम हो जाता है। दोनों दशाओं में दी गयी अधिक प्रोटीन एवं अधिक एनर्जी का पशु के दुग्ध उत्पादन और शारीरिक वृद्धि में कोई लाभ नहीं होताI इसक...

मेरापशु360 चना चूरी की विशेषताएं हैं खास दूध की क्षमता और फैट बढ़ाने में मददगार (हिंदी)

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  चने की चूरी एक पारंपरिक पशु आहार हैI जिसे पशु चाव से पसंद करके खाते हैंI आम तौर पर डेयरी  किसान अपने पशु को चने की चूरी खिलाते हैंI यह दूध उत्पादन बढ़ाने, स्वास्थ्य एवं पाचन को ठीक रखने  में सहायक हैI चने की चूरी पशुओं के लिए एक बेहतरीन आहार है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। चने की चूरी पशुओं का दूध बढ़ाने एवं स्वस्थ रखने में मदद करती है।  डेयरी किसान अपने पशु को चने की चूरी खिलाना पसंद करते हैं। यह दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है, साथ ही यह स्वास्थ्य और पोषण को ठीक रखने में सहायक है। बाजार में मिलने वाली चने की चूरी में मिलावट हो सकती है, इसलिए आप मेरापशु360 की प्रीमियम चना चूरी खरीद सकते हैं। इसमें प्रोटीन और एनर्जी का संतुलित स्रोत होता है। चने की चूरी में पाए जाने वाले पोषक तत्व इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट,फाइबर,विटामिन्स, मिनरल्स जैसे-आयोडीन, कापर, आयरन, फॉस्फोरस शामिल हैंI चने की चूरी से दूध और फैट कैसे बढ़ता है? चने की चूरी में प्रोटीन की उचित मात्रा होती है। प्रोटीन पशुओं के शरीर के विकास औ...

दुधारू पशुओं में एनर्जी का महत्त्व: इसलिए जरूरी है संतुलित 11000 हाई एनर्जी पैलेट्स (हिंदी)

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दुधारू पशुओं को दूध उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। दूध उत्पादन के लिए पशु अपने शरीर की संचित ऊर्जा का उपयोग करता है। यदि पशु को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती है, तो उसका वजन कम हो जाता है, स्वास्थ्य गिरता है, और दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है। आमतौर पर, ताजे ब्यांत और अधिक दूध देने वाले पशुओं के आहार में ऊर्जा की कमी पाई जाती है। पशु के कम खाने एवं दूध उत्पादन बढ़ने से इस ऊर्जा का अभाव और अधिक बढ़ जाता है। ऐसा देखा गया है, कि ब्यांत के बाद पशुओं में 70 से 100 किलो तक के आसपास शरीर का वजन कम होने लगता है।  अमूमन आपने देखा भी होगा की पशु जब दूध देना शुरू करता है तो उसका वजन पहले 2 महीने में कम हो जाता हैI इससे स्पष्ट होता है कि पशु जितना एनर्जी दूध उत्पादन के लिए खर्च करता है, उतना एनर्जी उसे अपनी खुराक से नहीं मिल पाती है और पशु अपने शरीर की एनर्जी को दूध उत्पादन में लगा देता हैI  ऐसे में पशु का वजन कम होने अर्थात स्वास्थ्य गिरने पर उसके गर्भधारण करने में समय लगता है, साथ ही दूध उत्पादन भी गिरने लगता है।  पशु आहार में इस कमी को दूर करने के लिए ही ...

बिनौला खल: भैंसों के लिए एक पौष्टिक सुपरफूड (हिन्दी)

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बिनौला खल , जिसे कपास के बीज का केक भी कहा जाता है, यह उच्च गुणवत्ता की प्रोटीन एवं फैट वाला पशु आहार हैI जो भैंसों के लिए उत्कृष्ट पोषण का स्रोत है। गाय के मुकाबले भैंस ज्यादा वजन वाली दुधारू पशु होती है और उनकी वृद्धि और दूध उत्पादन को बनाए रखने के लिए ऊर्जा और पोषक तत्वों से भरपूर पशु आहार की आवश्यकता होती है। बिनौला खल एक स्वादिष्ट और पचने योग्य पशु आहार है जिसे भैंस आसानी से खा लेती है। यह प्रोटीन एवं फैट से भरपूर होता हैI  बिनौला खल के फायदे: प्रोटीन का अच्छा स्रोत: बिनौला की खल के अंदर बाय-पास नेचर का अधिक प्रोटीन होता है, अतः यह पशु को अतिरिक्त प्रोटीन उपलब्ध कराता हैI जिसके कारण दूध उत्पादन में वृद्धि होती हैI  पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत: बिनौला की खल प्रोटीन और फैट का अच्छा स्रोत हैI जो भैंसों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। मजबूत प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली: बिनौला की खल में विटामिन-ई पाया जाता हैI जो भैसों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है, जिससे वो बीमारियों और संक्रमणों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हो जाती हैं। लागत-प्रभावी फ़ीड विकल्प: बिनौला ...