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जानिए कैसे सोया कटोरी से बढ़ेगा पाचन, ताकत और पशु का दूध उत्पादनI

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  भारत में पशु पालन एक मुख्य आजीविका है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां लाखों डेयरी किसान हर दिन गाय-भैंसों की देखभाल कर दूध उत्पादन करते हैं। लेकिन आज भी बहुत से पशुपालक ये नहीं समझ पाते कि पशु को सिर्फ भरपेट खिलाना ही पर्याप्त नहीं है। उसे असल में ज़रूरत है- संतुलित और पाचन योग्य पोषण देने की। यही वजह है कि कई बार पशु दूध कम देने लगते हैं, कमज़ोर हो जाते हैं या उनका पाचन तंत्र गड़बड़ हो जाता है। ऐसे में अक्सर पशुपालकों को लगता है कि दिक्कत खल या भूसी की मात्रा की है। पर असल में समस्या उनके पशु आहार की गुणवत्ता और उसमें मौजूद बायपास प्रोटीन की कमी की होती है। बाजार में मिलने वाले सामान्य चारे, चाहे वह भूसी हो या चूरी, केवल पेट भरने का काम करते हैं, लेकिन शरीर को ताकत देने और दूध उत्पादन को बनाए रखने के लिए उसमें जरूरी पोषण नहीं होता। इसी कमी को दूर करने के लिए मेरापशु360 लेकर आया है पोषण से भरपूर 'सोया कटोरी' यह एक ऐसा प्रोडक्ट है जो देखने में हल्का और कुरकुरा होता हैI लेकिन इसके पोषण में किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं किया गया है। यह सोयाबीन प्रोसेसिंग के बाद बनने वाला एक...

Now Order Cattle Feed Online — Quick, Affordable & Free of cost delivery with MeraPashu360 App

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    Dairy farmers are always busy looking after their cattles and keeping milk production steady. On top of that, their biggest headache is finding good-quality cattle feed at prices they can actually afford. Traditionally, buying cattle feed has meant long trips to distant markets or feed dealers, wasting time, fuel, and energy. And even after spending hours in transit, there is no guarantee of finding the right product at the right price. But what if there was a way to get high-quality cattle feed delivered to your doorstep, without stepping out of your home? MeraPashu360 has made this possible. With just a few taps on your phone, you can now order high-quality cattle feed at competitive prices and get it delivered—free home delivery in Haryana, Western UP, Delhi/NCR. This revolutionary mobile app is changing the way dairy farmers manage their essential feed needs by making the entire online process simple and farmer-friendly. MeraPashu360 app offers a wide range of feed pr...

दूध उत्पादन बढ़ाने में चना छिलका ऐसे करता है मदद- जानिए चना छिलका के फायदेI

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  डेयरी पालन में सबसे ज़रूरी चीज़ होती है – पशु का संपूर्ण पोषण। जब तक आपके पशु को सही पोषण नहीं मिलेगा, तब तक उससे अधिक मात्रा में और अच्छी गुणवत्ता वाला दूध प्राप्त कर पाना मुश्किल है। एक संतुलित आहार में एनर्जी, प्रोटीन, फाइबर, मिनरल्स और विटामिन्स का सही अनुपात ज़रूरी होता है। आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक किफायती, फायदेमंद और स्वाभाविक रूप से पौष्टिक आहार की– जिसका नाम है चना-छिलका । यह चने की प्रोसेसिंग के दौरान बचा हुआ छिलका होता है, लेकिन इसके पोषण मूल्य कम नहीं होते। दरअसल, यही छिलका पशुओं के लिए एक बेहतरीन फाइबर और प्रोटीन का स्रोत बन जाता है। चना-छिलका में लगभग 11% तक प्राकृतिक प्रोटीन होता है, जो दूध देने वाले पशुओं के लिए बेहद उपयोगी है। यह प्रोटीन न केवल मांसपेशियों के निर्माण में मदद करता है, बल्कि पशु की आंतरिक सेहत को भी बेहतर बनाता है। इसके साथ ही इसमें फाइबर की मात्रा भी अच्छी होती है, जिससे पशु का पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। जब पशु का पाचन अच्छा रहता है तो उसका खाना पूरी तरह से पचता है, जिससे पोषक तत्वों का शरीर में बेहतर अवशोषण होता है और इसका सीधा असर दूध की ...

Top Benefits of Binola Khal Cattle Feed for Milk-Producing Cows and Buffaloes

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  In dairy farming, the health and productivity of cattle are closely linked to their nutrition. One such essential feed that has gained immense popularity among Indian dairy farmers is Binola Khal (Cottonseed Cake). Known for its high fat/protein content, Binola Khal is especially beneficial for milk-producing cows and buffaloes. If you’re looking to improve milk yield, enhance milk quality, and keep your cattle in excellent health, incorporating Binola Khal into your feeding regimen can make a significant difference. Let’s understand what makes Binola Khal so effective and why it’s a staple choice for dairy farmers across India. What is Binola Khal and Why is it Important in Dairy Farming? Binola Khal is a by-product derived from cottonseeds after oil extraction. It is naturally rich in protein and fat, making it an ideal feed for dairy cattle. In modern dairy farming, where productivity and profitability depend on milk output and quality, balanced nutrition is non-negotiable. Da...

जानिए बॉडी कंडीशन स्कोर (BCS) क्या है। पशु के स्वास्थ्य और बाडी स्कोर का दूध उत्पादन पर क्या प्रभाव होता है

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दूध उत्पादन से जुड़े किसान और डेयरी मालिक अपने पशुओं से अधिकतम दूध उत्पादन की अपेक्षा रखते हैं इसके लिए बॉडी स्कोर (BCS) की जानकारी अधिक दूध उत्पादन के लिए आपकी सहायता करेगी । बॉडी स्कोर एक मापदंड है, जिससे पशु के शरीर की चर्बी, पोषण स्तर और संपूर्ण स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन किया जाता है। आमतौर पर इसे 1 से 5 के पैमाने पर मापा जाता है, जहां एक अत्यधिक कमजोर और पांच  जरूरत से ज्यादा मोटे पशु को दर्शाता है। डेयरी उद्योग में इसका बड़ा योगदान है क्योंकि सही बॉडी स्कोर वाले पशु अधिक दूध देते हैं, प्रजनन क्षमता बेहतर होती है और बीमारियों से बचाव भी होता है। डेयरी फार्मिंग में बॉडी स्कोर का महत्व: दूध उत्पादन पर सीधा प्रभाव: कम बॉडी स्कोर वाले पशु पोषण की कमी अथवा बीमारी  से जूझते हैं, जिससे दूध उत्पादन घटता है। वहीं, जरूरत से ज्यादा मोटे पशुओं में भी प्रजनन और इम्यूनिटी की समस्या आ सकती है। प्रजनन क्षमता बेहतर होती है: यदि गाय या भैंस का बॉडी स्कोर संतुलित है, तो उनका हीट साइकल सही रहता है और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है। बीमारियों से बचाव: कमजोर या बहुत मोटे पशु में कैल्शि...

क्या आपके पशु को सही पोषण मिल रहा है? जानिए संतुलित आहार का महत्व

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  किसान भाइयों, क्या आप जानते हैं कि आपके पशु का स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसा आहार दे रहे हैं? अक्सर किसान पारंपरिक पशु आहार जैसे चूरी, खली, अनाज, चोकर आदि पर निर्भर रहते हैं, लेकिन क्या ये वास्तव में संपूर्ण पोषण प्रदान करते हैं? सच्चाई यह है कि अकेला कोई भी पशु आहार पशु की पोषण आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता। दूध देने वाले पशुओं के लिए संतुलित आहार बेहद आवश्यक होता है ताकि उनका पाचन तंत्र सही ढंग से काम करे और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो। आइए विस्तार से समझते हैं कि अलग-अलग प्रकार के पशु आहार का क्या प्रभाव होता है और सही संतुलन क्या होना चाहिए। क्या अकेला अनाज या खली पशुओं के लिए पर्याप्त है? जैसे अगर किसान अपने पशुओं को केवल चना छिलका खिलाता है, तो क्या यह पशु के लिए पर्याप्त होगा? बिल्कुल क्योंकि चना छिलका में प्रोटीन और एनर्जी की मात्रा होती ही नहीं है और फाइबर की मात्रा अधिक होती है। चने का फाइबर ठोस होता है, अतः पशु इसको पचा नहीं पता है। जिससे पशु को चने के छिलके से कुछ नहीं मिल पाता । इसी तरह, यदि हम पशु को सिर्फ सरसों की ...

ब्याने के 21 दिन पहले से DCAD पाउडर के साथ कैल्शियम का उचित प्रबंधन कितना जरूरी?

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  पशुपालक भाइयों, आप में से अधिकांश पशु के ब्याने के समय कैल्शियम का महत्व जानते हैं लेकिन यह  नहीं जानते कि 50 प्रतिशत पशुओं को कैल्शियम की सब-क्लीनिकल कमी होती है और पशु पूरे ब्यांत   2-3 लीटर दूध प्रतिदिन कम देता है। बीमार होने की अधिक संभावनाए होती हैं, जैसे: ब्याते समय बच्चा फंसना, गर्भाशय में इन्फेक्शन होना, सफेद स्राव जाना, थनैला होना, देरी से हीट में आना। कैल्शियम की क्लीनिकल कमी पहले के अतिरिक्त प्रोलैप्स और मिल्क फीवर भी कर देती है। अतः इन समस्याओं से बचने के लिए DCAD पाउडर एक प्रभावी समाधान है। ब्याने के दौरान पशु के शरीर में क्या होता है? ब्याने के समय पशु को अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है और स्ट्रेस रहता है। इस समय बाहर से कैल्शियम का स्रोत कैल्शियम की कमी को दूर नहीं कर सकता। इस समय कैल्शियम का स्रोत देना भी नहीं चाहिए। क्यों? क्योंकि इस समय कैल्शियम की तुरंत आपूर्ति पशु की लंबी हड्डियों में संरक्षित कैल्शियम से होती है। इस प्रक्रिया को सक्रिय करने के लिए ब्याने से 15-20 दिन पहले मिनरल मिक्सचर देना बंद कर देना चाहिए और उसे अधिक सक्रिय करने के लिए DCAD प...