क्या आपके पशु को सही पोषण मिल रहा है? जानिए संतुलित आहार का महत्व
सच्चाई यह है कि अकेला कोई भी पशु आहार पशु की पोषण आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता। दूध देने वाले
पशुओं के लिए संतुलित आहार बेहद आवश्यक होता है ताकि उनका पाचन तंत्र सही ढंग से काम करे और दूध
उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो। आइए विस्तार से समझते हैं कि अलग-अलग प्रकार के पशु आहार का क्या प्रभाव होता है
और सही संतुलन क्या होना चाहिए।
क्या अकेला अनाज या खली पशुओं के लिए पर्याप्त है?
जैसे अगर किसान अपने पशुओं को केवल चना छिलका खिलाता है, तो क्या यह पशु के लिए पर्याप्त होगा? बिल्कुल क्योंकि चना छिलका में प्रोटीन और एनर्जी की मात्रा होती ही नहीं है और फाइबर की मात्रा अधिक होती है। चने का फाइबर ठोस होता है, अतः पशु इसको पचा नहीं पता है। जिससे पशु को चने के छिलके से कुछ नहीं मिल पाता ।
इसी तरह, यदि हम पशु को सिर्फ सरसों की खल खिलाते हैं जिसमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट से तुलनात्मक अधिक होती
है। इसके कारण पशु के रूमेन (पाचन तंत्र) में मौजूद बैक्टीरिया इसे पूर्ण रुप से नहीं पचा पाते। यही कारण है कि
केवल एक प्रकार के आहार पर निर्भर रहना आपके पशु के लिए सही नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि सही
आहार में किन तत्वों का संतुलन होना चाहिए?
संतुलित आहार का सही अनुपात क्या होना चाहिए?
संतुलित आहार का अर्थ है कि पशु को सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त हों। आइए जानते हैं कि एक
संपूर्ण पशु आहार में किन चीजों को कितनी मात्रा में मिलाना चाहिए:
- 30% खली (सरसों की खल + बिनौला खल) – प्रोटीन प्रदान करने के लिए
- 35-40% अनाज (मक्का, गेहूं, जौ, बाजरा आदि) – कार्बोहाइड्रेट/ एनर्जी के लिए
- 15-20% चोकर (गेहूं चोकर, चावल चोकर आदि) –प्रोटीन और एनर्जी का मध्यम स्रोत
15-20% चूरी (चना, अरहर और मसूर चूनी)
2% मिनरल मिक्सचर – कैल्शियम, फॉस्फोरस और अन्य आवश्यक खनिजों के लिए
- समय का आभाव: अलग-अलग प्रकार के आहार को सही अनुपात में मिलाना काफी मेहनत और समय लेने वाला काम है।
- संतुलन बनाए रखना कठिन: सही मात्रा में पोषक तत्व मिलाने में गलती होने की संभावना रहती है।
- असंतुलित आहार से नुकसान: यदि आहार संतुलित नहीं है, तो पशु को जरूरी पोषण नहीं मिलेगा, जिससे उसकी सेहत प्रभावित होगी और दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
- सभी आवश्यक पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मौजूद हैं।
- खली, अनाज, चूरी, चोकर और मिनरल्स का सही मिश्रण मौजूद होता है।
- पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और दूध उत्पादन में सुधार करता है।
- किसान भाइयों को अलग-अलग आहार मिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।