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क्या आपके पशु को सही पोषण मिल रहा है? जानिए संतुलित आहार का महत्व

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  किसान भाइयों, क्या आप जानते हैं कि आपके पशु का स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसा आहार दे रहे हैं? अक्सर किसान पारंपरिक पशु आहार जैसे चूरी, खली, अनाज, चोकर आदि पर निर्भर रहते हैं, लेकिन क्या ये वास्तव में संपूर्ण पोषण प्रदान करते हैं? सच्चाई यह है कि अकेला कोई भी पशु आहार पशु की पोषण आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता। दूध देने वाले पशुओं के लिए संतुलित आहार बेहद आवश्यक होता है ताकि उनका पाचन तंत्र सही ढंग से काम करे और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो। आइए विस्तार से समझते हैं कि अलग-अलग प्रकार के पशु आहार का क्या प्रभाव होता है और सही संतुलन क्या होना चाहिए। क्या अकेला अनाज या खली पशुओं के लिए पर्याप्त है? जैसे अगर किसान अपने पशुओं को केवल चना छिलका खिलाता है, तो क्या यह पशु के लिए पर्याप्त होगा? बिल्कुल क्योंकि चना छिलका में प्रोटीन और एनर्जी की मात्रा होती ही नहीं है और फाइबर की मात्रा अधिक होती है। चने का फाइबर ठोस होता है, अतः पशु इसको पचा नहीं पता है। जिससे पशु को चने के छिलके से कुछ नहीं मिल पाता । इसी तरह, यदि हम पशु को सिर्फ सरसों की ...

ब्याने के 21 दिन पहले से DCAD पाउडर के साथ कैल्शियम का उचित प्रबंधन कितना जरूरी?

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  पशुपालक भाइयों, आप में से अधिकांश पशु के ब्याने के समय कैल्शियम का महत्व जानते हैं लेकिन यह  नहीं जानते कि 50 प्रतिशत पशुओं को कैल्शियम की सब-क्लीनिकल कमी होती है और पशु पूरे ब्यांत   2-3 लीटर दूध प्रतिदिन कम देता है। बीमार होने की अधिक संभावनाए होती हैं, जैसे: ब्याते समय बच्चा फंसना, गर्भाशय में इन्फेक्शन होना, सफेद स्राव जाना, थनैला होना, देरी से हीट में आना। कैल्शियम की क्लीनिकल कमी पहले के अतिरिक्त प्रोलैप्स और मिल्क फीवर भी कर देती है। अतः इन समस्याओं से बचने के लिए DCAD पाउडर एक प्रभावी समाधान है। ब्याने के दौरान पशु के शरीर में क्या होता है? ब्याने के समय पशु को अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है और स्ट्रेस रहता है। इस समय बाहर से कैल्शियम का स्रोत कैल्शियम की कमी को दूर नहीं कर सकता। इस समय कैल्शियम का स्रोत देना भी नहीं चाहिए। क्यों? क्योंकि इस समय कैल्शियम की तुरंत आपूर्ति पशु की लंबी हड्डियों में संरक्षित कैल्शियम से होती है। इस प्रक्रिया को सक्रिय करने के लिए ब्याने से 15-20 दिन पहले मिनरल मिक्सचर देना बंद कर देना चाहिए और उसे अधिक सक्रिय करने के लिए DCAD प...

सही ब्यांत और अधिक दूध उत्पादन के लिए पशु को दें, उत्तम क्वालिटी का ‘कैल्शियम’ सप्लीमेंट

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  डेयरी फार्मिंग में एक छोटी-सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। कई किसान यह सोचते हैं कि अगर पशु को सही आहार और पानी मिल रहा है, तो वह पूरी तरह स्वस्थ रहेगा। लेकिन क्या होगा अगर आपकी गाय-भैंस दूध देते हुए अचानक खड़ी न हो पाए, दूध कम देने लगे, या फिर ब्याने के तुरंत बाद कमजोरी महसूस करे? डेयरी फार्मिंग में एक छोटी-सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। कई किसान यह सोचते हैं कि अगर पशु को सही आहार और पानी मिल रहा है, तो वह पूरी तरह स्वस्थ रहेगा। लेकिन क्या होगा अगर आपकी गाय-भैंस दूध देते हुए अचानक खड़ी न हो पाए, दूध कम देने लगे, या फिर ब्याने के तुरंत बाद कमजोरी महसूस करे? लेकिन कई डेयरी किसान इस समस्या से अनजान रहते हैं, जिससे उनके पशु कैल्शियम की कमी के कारण विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हैं। ब्याने के बाद पशु सुस्त हो जाता है, उसकी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, और दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है। पशु को उठने-बैठने में दिक्कत होती है, जिसे मिल्क फीवर कहा जाता है। इसके अलावा, प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है, और गंभीर स्थिति में ब्याने के बाद पशु की अचानक मृत्य...

सही नस्ल और बेहतर प्लानिंग से डेयरी फार्मिंग में ऐसे करें मोटी कमाई

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  अगर आप डेयरी फार्मिंग शुरू करने की सोच रहे हैं, तो सही जानकारी और तैयारी आपके इस सपने को एक सफल व्यवसाय में बदल सकती है। दूध उत्पादन को बढ़ाने और बेहतर मुनाफा कमाने के लिए सबसे अहम है सही नस्ल का चयन, उचित बुनियादी ढांचा, और सही श्रम की योजना। आज हम इन्हीं मुख्य कारकों पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आपका डेयरी फार्म सफल बन सके। सही नस्ल का चयन कैसे करें? डेयरी फार्मिंग में सबसे पहला और महत्वपूर्ण कार्य है सही नस्ल का चयन करना। नस्ल का चुनाव करते समय ध्यान दें कि आपके क्षेत्र की जलवायु और बाजार में इन नस्लों की मांग कैसी है। गाय की नस्लें साहीवाल: भारतीय नस्लों में साहीवाल गाय दूध उत्पादन में अव्वल है। यह कम चारा खाकर भी अच्छी मात्रा में दूध देती है। गिर गाय: गिर नस्ल की गायें गुजरात और राजस्थान में पाई जाती हैं। इनसे मिलने वाला दूध ए2 प्रोटीन से भरपूर होता है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। जर्सी और होल्स्टीन फ्रिजियन (HF): विदेशी नस्लों में जर्सी और HF गायें अधिक दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं। हालांकि, इनकी देखभाल के लिए थोड़ा अधिक खर्च करना पड़ता है। भैंस की नस्लें म...

सर्दियों में बछड़े-बछियों की देखभाल: जानें बीमारियों से बचाव के बेहतरीन उपाय

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  भारत के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन का व्यवसाय किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बनता जा रहा है। दुधारू पशुओं के साथ-साथ उनके बछड़े-बछियों का सही तरीके से पालन करना आवश्यक है, क्योंकि वो  भविष्य में दूध उत्पादन और कृषि कार्यों के लिए उपयोगी होते हैं। वहीं सर्दियों के मौसम में ठंड का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि दुधारू पशुओं पर भी पड़ता है। अगर ठंड के दौरान बछड़े-बछियों की सही देखभाल नहीं की गई, तो वे बीमार पड़ सकते हैं, जो पशुपालकों के लिए बड़ा नुकसान हो सकता है। ठंड के कारण बछड़े-बछियों में निमोनिया और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पशुपालक उनके खानपान और रहने की स्थिति पर विशेष ध्यान देकर उन्हें इन समस्याओं से बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कि ठंड में बछड़े-बछियों को स्वस्थ रखने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए जा सकते हैं। ठंड से बचाने के उपाय: सर्दियों में मवेशियों को गर्म रखने के लिए उनकी पशुशाला को साफ, सूखा और गर्म बनाना बेहद जरुरी है। पशुशाला में नियमित रूप से फिनाइल या अन्य एंटीबायोटिक दवाओं का छिड़काव करें। फर्श पर सूखा पुआल और घास का बिछावन करें। खिड़कियों...