पशु आहार में दलिया/अनाज का सही अनुपात क्यों है जरूरी? जानें
पशु आहार का संतुलन रखना हर डेयरी किसान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पशु ब्याने के बाद दूध उत्पादन को बढ़ाने की इच्छा में किसान अक्सर आहार में अनाज की मात्रा अधिक कर देते हैं। यह गलती न केवल दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकती है बल्कि पशु के स्वास्थ्य को भी बिगाड़ सकती है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि संतुलित पशु आहार में अनाज/दलिया का उचित प्रतिशत क्या होना चाहिए क्यों होना चाहिए।
1. पशु आहार में अनाज का संतुलन क्यों है जरूरी?
ब्याने के बाद गाय या भैंस को अधिक दूध देने के लिए रातब में अचानक अनाज का बदलाव करना नुकसानदायक हो सकता है।
रूमेन का पीएच असंतुलन: अधिक अनाज से रूमेन का पीएच बिगड़ जाता है।
भूंसे का पाचन प्रभावित: जब रातब में अनाज का प्रतिशत 40% से अधिक होता है, तो भूंसे और चारे का पाचन सही तरीके से नहीं हो पाता।
दूध और फैट में गिरावट: फैट की मात्रा मुख्यतः चारे के पाचन से आती है। जब यह पाचन खराब होता है, तो दूध और फैट दोनों घट जाते हैं। इस दौरान पशु को स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैंI जैसे: पतला गोबर आना, पिछले पैरों से लंगड़ाना, शरीर की ऊर्जा कम होनाI
2. अनाज का संतुलित उपयोग करें: अनाज की मात्रा को कुल रातब का 40% से अधिक न रखें। ध्यान रहे कि अनाज के कम होने से भी दूध का उत्पादन कम हो जाता है , दूध का SNF कम हो जाता है लेकिन उसका कारण दूसरा होता है। अतः पशु को संतुलित आहार जैसे मेरापशु360 का संतुलित पशु आहार 15000 खिलाएं, इसमें अनाज का सही प्रतिशत और अन्य सभी तत्व होते हैं।
रुमेन का पीएच ठीक रखें: अनाज के साथ 60 ग्राम मीठा सोडा हर दिन पशु के रातब में मिलाएं। यह रूमेन की पी. एच. को उचित स्तर पर बनाये रखता है जिससे रुमेन के सभी किस्म के जीवाणुओं की रेशो एवं संख्या बदलती नहीं है। और जीवाणुओं की सहायता से पशु का पाचन ठीक बना रहता है। रूमेन में जीवाणुओं से सही पाचन के लिए मिनरल मिक्चर और यीस्ट कल्चर को सानी में मिलाने का बड़ा महत्व है। उत्तम पाचन के लिए यह बेहद आवश्यक है।
आहार को संतुलित रखें: गाय/भैंस से क्षमता के अनुरूप उत्पादन एवं स्वास्थ के लिए दाना, चारा और भूंसे का सही अनुपात रखें।
पशु आहार में धीरे-धीरे बदलाव करें: रातब में कोई भी बदलाव अचानक से न करें। आहार में परिवर्तन करते समय इसे धीरे-धीरे शुरू करें ताकि पशु के रूमेन यानि बड़े पेट के जीवाणु बदलते रातब के अनुसार विकसित हो सकें और पाचन को असरदार बनाये रखें।
निष्कर्ष: पशु के रातब में अनाज की मात्रा 35-40 प्रतिशत के आस पास रखें। अनाज की मात्रा में धीरे धीरे बदलाव करें। पशु को केवल अनाज खिलाने से पूरा लाभ नहीं मिलता है बल्कि पशु का उत्पादन कम हो सकता है,पशु कमजोर हो सकता है, पशु का पाचन गड़बड़ होने से पशु का गोबर पतला रहता है। अतः सलाह दी जाती है कि रातब के साथ मीठा सोडा 60 ग्राम प्रतिदिन आधा-आधा सुबह व शाम रातब या सानी में मिलाकर दें।
